कानपुर में 3 प्रमुख दलों ने ब्राम्हण प्रत्याशी उतारे: मेयर प्रत्याशी ब्राम्हण क्यों…?

कानपुर प्रदेश का एक ऐसा जिला है जहां पर भाजपा, सपा और कांग्रेस ने ब्राह्मण महापौर प्रत्याशी उतारा है। इस बार तीनों प्रमुख पार्टियों ने ब्राह्मण कैंडिडेट पर दांव लगाया है। भाजपा, सपा और कांग्रेस तीनों पार्टियां ब्राह्मण कैंडिडेट में अपनी जीत की गणित तैयार की है। आइए आपको बताते है कि आखिर तीनों पार्टियों ने ब्राह्मण प्रत्याशी क्यों उतारा और आखिर किस तरह से वह इन प्रत्याशियों को मजबूत दावेदार और अपनी जीत की गुणा-गणित बता रहे हैं। पढ़ें दैनिक भास्कर की खास रिपोर्ट…।

पहले कांग्रेस फिर सपा और भाजपा ने ब्राह्मण प्रत्याशी उतारा

कानपुर में महापौर प्रत्याशी की महिला सीट होने के चलते सबसे पहले कांग्रेस ने युवा नेता प्रदेश सचिव विकास अवस्थी की पत्नी आशनी को महापौर का टिकट दिया। इसके बाद सपा ने भी ब्राह्मण कार्ड खेलते हुए कानपुर में विपक्ष की मजबूत भूमिका निभा रहे अमिताभ बाजपेई की पत्नी वंदना बाजपेई को प्रत्याशी बनाकर ब्राह्मण कार्ड खेला। दोनों पार्टियों से ब्राह्मण कैंडिडेट घोषित होने के बाद भाजपा में बैरिस्टर नरेंद्र जीत सिंह की बहू नीतू सिंह की टिकट को लेकर काफी मंथन चला। पंचायत दिल्ली तक पहुंची और महापौर रही प्रमिला पांडेय का ब्राह्मण होने के नाते पलड़ा भारी पड़ा और उनका टिकट रिपीट कर दिया गया।

नामांकन कराते हुए सपा महापौर प्रत्याशी वंदना बाजपेई, साथ में पति विधायक अमिताभ बाजपेई और पूर्व सांसद राजाराम पाल।

समजवादी पार्टी से मैदान में वंदना बाजपेई

  • MLA इरफान सोलंकी कांड में आर्य नगर सीट से सपा विधायक अमिताभ बाजपेई सरकार को घेरा और कार्रवाई का विरोध किया। इसके बाद उनकी छवि मुस्लिमों के बीच हीरो की तरह और मजबूत विपक्षी नेता की तरह बनकर उभरी। इसी वजह से उनकी पत्नी को पार्टी ने टिकट दिया।
  • ब्राह्मण टिकट देने से सपा को यादव, पिछड़े वर्ग और मुस्लिमों के साथ ब्राह्मणों का भी वोट मिलेगी।
  • कानपुर में विधायक अमिताभ बाजपेई लगातार विपक्ष की भूमिका मजबूती से उठा रहे हैं। इसके चलते उनकी पत्नी वंदना बाजपेई को टिकट मिला।
  • आर्य नगर विधानसभा में भाजपा के पूरी ताकत झोंकने और अमित शाह के रोड शो को फ्लॉप करके दूसरी बार अमिताभ आर्य नगर सीट से विधायक बने।
  • पीपीएन कॉलेज में महामंत्री रहने के दौरान छात्र राजनीति से समाजवादी पार्टी से जुड़े हैं। आज तक कोई दल नहीं बदला और दोबारा विधायक बनकर पार्टी के सबसे विश्वसनीय नेता के रूप में उनकी छवि उभरी है।
नामांकन कराने जाती भाजपा से महापौर प्रत्याशी प्रमिला पांडेय, साथ में कैबिनेट मंत्री नंद गोपाल गुप्ता नंदी, विधायक महेश त्रिवेदी, एमएलसी सलिल विश्नोई समेत अन्य नेता।

भाजपा ने प्रमिला पांडेय को रिपीट किया

  • कांग्रेस और सपा ने कानपुर में ब्राह्मण महापौर प्रत्याशी घोषणा में ब्राह्मण कार्ड खेला। इसके चलते ब्राह्मणों में सबसे मजबूत चेहरा और पब्लिक के बीच अलग छवि की नेता प्रमिला पांडेय का भाजपा को टिकट रिपीट करना मजबूरी बन गया।
  • कानपुर में महिला सीट होने के चलते बैरिस्टर नरेंद्र जीत सिंह की बहू व सांसद सत्यदेव पचौरी की बेटी नीतू सिंह, कमलावती सिंह, पूनम कपूर, पूनम द्विवेदी समेत टॉप-5 नामों की लिस्ट ऊपर भेजी गई थी। लेकिन प्रमिला पांडेय से मजबूत किसी का राजनैतिक कॅरियर नहीं था और ब्राह्मण को टिकट देनी थी। इसके चलते उनका टिकट रिपीट कर दिया गया।
  • पार्षद से महापौर तक का सफर, पांच साल तक क्षेत्र में सक्रिय रहीं, आम पब्लिक के बीच चर्चा में रहना और देशी अंदाज है।
  • यह भी माना जा रहा है कि भाजपा ने अंतरकलह से बचने के लिए भी प्रमिला पांडेय का टिकट रिपीट किया है। संगठन और संघ की लड़ाई में संगठन का पलड़ा भारी पड़ा और दिल्ली से फैसले के बाद टिकट रिपीट कर दिया गया।

कांग्रेस ने युवा और जुझारू नेता पर लगाया दांव

  • कांग्रेस ने आम कार्यकर्ता से प्रदेश सचिव तक पहुंचे विकास अवस्थी की पत्नी आशनी को टिकट देकर आम लोगों के बीच जगह बनाने की कोशिश की है।
  • विकास अवस्थी गोविंद नगर विधानसभा से टिकट मांग रहे थे, लेकिन विधानसभा चुनाव में करिश्मा ठाकुर को टिकट दे दी गई थी। उन्हें आश्वासन दिया गया था कि महापौर का टिकट दिया जाएगा। इसके चलते विकास को टिकट देकर विकास और पार्टी के आम कार्यकर्ता को संतुष्ट करने की कोशिश।
  • युवा और सक्रिय ब्राह्मण चेहरों में विकास की मजबूत छवि।
  • कांग्रेस से महिला प्रत्याशियों की दावेदारी कम थी। टिकट मांगने वालों में विकास ही सबसे मजबूत छवि के थे। इस कारण उनकी पत्नी को टिकट दिया गया।
  • विकास अवस्थी पूर्व छात्र नेता हैं। उनके पास कानपुर साउथ सिटी से लेकर शहर में युवाओं की अच्छी टीम है। इसके चलते भी उनकी पत्नी को टिकट दिया गया है।

पुरबिया बनाम कान्यकुब्ज की लड़ाई

तीनों प्रमुख दलों से ब्राह्मण प्रत्याशी घोषित होने के बाद सपा विधायक अमिताभ बाजपेई ने ब्राह्मणों की लड़ाई को पुरबिया बनाम सरयूपारी बना दिया है। अमिताभ बाजपेई का कहना है कि कानपुर में सबसे अधिक कान्यकुब्ज ब्राह्मण हैं। जबकि प्रमिला पांडेय पूर्वांचल की ब्राह्मण हैं। इससे साफ है कि प्रमिला पांडेय पुरबिया ब्राह्मण हैं। वंदना बाजपेई खुद को कान्यकुब्ज बताते हुए इस बार खुद को वोट मिलने का दावा कर रहे हैं। लेकिन भाजपा नेताओं ने इस गणित को सिरे से खारिज किया है। उनका कहना है कि पार्टी को पहले भी ब्राह्मणों का पूरा वोट और सपोर्ट मिलता था और अब भी मिलता रहेगा। वहीं, कांग्रेस प्रत्याशी विकास की पत्नी आशनी भी कान्यकुब्ज ब्राह्मण हैं।

Author: अनुज प्रताप सिंह

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *